Ration Card Big News: देश भर में 2.25 करोड़ अपात्र लोगों के नाम राशन कार्ड सूची से काटे गए, पारदर्शिता हुई मजबूत

केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत संचालित मुफ्त राशन योजना में पारदर्शिता लाने के लिए एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, देश भर में सत्यापन (Verification) अभियान चलाकर 2.25 करोड़ से अधिक अपात्र लाभार्थियों के नाम राशन कार्ड सूची से हटा दिए गए हैं।

यह कार्रवाई इसलिए की गई है ताकि मुफ्त राशन योजना का लाभ केवल उन्हीं गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचे जो वास्तव में इसके पात्र हैं। इन अपात्र व्यक्तियों की पहचान पूरी करने के बाद राज्य सरकारों को कार्रवाई के लिए निर्देश दिए गए थे।

किन लोगों के नाम सूची से हटाए गए?

केंद्रीय खाद्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चार से पाँच महीनों में यह बड़े पैमाने पर सत्यापन अभियान चलाकर अपात्र नामों को सूची से हटाया गया है। सत्यापन के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए जो पात्रता मानदंड पर खरे नहीं उतरते थे।

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  • आय सीमा का उल्लंघन: ऐसे लाभार्थी जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक थी।
  • अतिरिक्त संपत्ति: जिनके पास चार पहिया वाहन थे।
  • उच्च पद पर कार्यरत: जो लोग कंपनियों में निदेशक या किसी उच्च पद पर कार्यरत थे।
  • मृत व्यक्तियों के नाम: सूची में ऐसे मृत व्यक्तियों के नाम भी शामिल थे जिनका रिकॉर्ड अब तक अपडेट नहीं हुआ था।

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि ऐसे सभी नामों को सूची से हटाकर सिस्टम को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाया गया है।

मुफ्त राशन योजना के तहत मिलने वाला लाभ

NFSA के तहत, गरीब और पात्र परिवारों को मासिक आधार पर रियायती दर पर या मुफ्त में खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है।

  • प्राथमिकता श्रेणी: इस श्रेणी के प्रत्येक सदस्य को मासिक आधार पर पाँच किलो मुफ्त खाद्यान्न (गेहूं या चावल) मिलता है।
  • अंत्योदय अन्न योजना (AAY) परिवार: इस श्रेणी के परिवारों को हर महीने कुल 35 किलो अनाज दिया जाता है।

राज्यों द्वारा तय होते हैं पात्रता के नियम

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों की 75 प्रतिशत जनसंख्या और शहरी क्षेत्रों की 50 प्रतिशत आबादी इस योजना के दायरे में आती है।

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  • सत्यापन की जिम्मेदारी: लाभार्थियों की अंतिम पहचान और सूची का निरंतर सत्यापन राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है। केंद्र सरकार राज्यों को संदिग्ध लाभार्थियों की सूची भेजती है, जिसके बाद दस्तावेजों की जांच करके पात्रता तय की जाती है।
  • प्रणाली का नवीनीकरण: यह प्रक्रिया लगातार चलती रहती है ताकि पात्र व्यक्तियों को जोड़ा जा सके और अपात्र लोगों को हटाया जा सके, जिससे प्रणाली हमेशा अद्यतन (Updated) बनी रहे।

देश में वर्तमान समय में 19 करोड़ से ज्यादा राशन कार्ड धारक पंजीकृत हैं और लगभग पाँच लाख उचित मूल्य की दुकानें (Fair Price Shops) संचालित हो रही हैं। सरकार का कहना है कि अपात्र लोगों को हटाने से वास्तविक लाभार्थियों की पहुँच और सिस्टम की पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।

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